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भारत के इडली, उत्पम और समोसे को वैश्विक स्तर पर एक बड़ा ब्रांड बनाने की तैयारी
Anuga Foodtech India 2026 : भारत अपने पारंपरिक व्यंजनों जैसे इडली, उत्पम और समोसा को वैश्विक स्तर पर एक बड़ा ब्रांड बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। जिस तरह इटली ने पास्ता और जापान ने सुशी को पूरी दुनिया के खानपान का अहम हिस्सा बना दिया, उसी तरह भारत भी अपनी ‘फूड डिप्लोमेसी’ (खद्य कूटनीति) और आधुनिक फूड प्रोसेसिंग तकनीक के जरिए भारतीय व्यंजनों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थापित करना चाहता है। खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के उप कृषि विपणन सलाहकार एवं निदेशक डॉ. जे.पी. डोंगरे ने कहा कि भारत के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग…
Anuga Foodtech India 2026 : भारत अपने पारंपरिक व्यंजनों जैसे इडली, उत्पम और समोसा को वैश्विक स्तर पर एक बड़ा ब्रांड बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। जिस तरह इटली ने पास्ता और जापान ने सुशी को पूरी दुनिया के खानपान का अहम हिस्सा बना दिया, उसी तरह भारत भी अपनी ‘फूड डिप्लोमेसी’ (खद्य कूटनीति) और आधुनिक फूड प्रोसेसिंग तकनीक के जरिए भारतीय व्यंजनों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थापित करना चाहता है।
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार के उप कृषि विपणन सलाहकार एवं निदेशक डॉ. जे.पी. डोंगरे ने कहा कि भारत के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में मूल्य-संवर्धन और निर्यात विस्तार की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा, “भारतीय खाद्य प्रसंस्करण का अनुमानित मूल्य 500 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है। कृषि उत्पादन को मूल्य-संवर्धित उत्पादों में बदलने और निर्यात बढ़ाने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।” डा. डोंगरे का कहना है कि भारत इसमें पीछे क्यों रहे ?
भारतीय व्यंजनों को ग्लोबल ब्रांड बनाने की तैयारी
भारतीय खाद्य एवं पेय उद्योग को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए मूल्य-संवर्धन, आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रसंस्करण क्षमता और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उद्योग जगत और सरकार के शीर्ष प्रतिनिधियों ने यह बात नई दिल्ली में आयोजित ‘अनुगा सिलेक्ट इंडिया’ और ‘अनुगा फूडटेक इंडिया 2026’ के कर्टेन-रेज़र कार्यक्रम के दौरान कही।
खाद्य, पेय और तकनीक पारिस्थितिकी तंत्र का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंच ‘अनुगा सिलेक्ट इंडिया’ और ‘अनुगा फूडटेक इंडिया 2026’ 29 सितंबर से 1 अक्टूबर 2026 तक मुंबई के बॉम्बे एग्जिबिशन सेंटर में आयोजित किया जाएगा। कोइलनमेस्से द्वारा आयोजित इस 19वें संस्करण में एग्रीफूड्स, डेयरी, पेय पदार्थ, फाइन फूड्स, ऑर्गेनिक उत्पाद तथा स्वीट्स एवं स्नैक्स सहित विभिन्न क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक, सोर्सिंग और व्यापारिक साझेदारी के अवसर सामने आएंगे।
फूड प्रोसेसिंग में आधुनिक तकनीक और निर्यात विस्तार पर फोकस
डॉ. जे.पी. डोंगरे ने पंजाब केसरी से बातचीत में कहा कि सरकार आधुनिक मशीनरी, पैकेजिंग और कोल्ड-चेन अवसंरचना के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है। प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना (पीएमएफएमई ) के तहत पिछले पांच वर्षों में करीब 2 लाख सूक्ष्म उद्यमियों को औपचारिक क्षेत्र में लाया गया है।
डॉ. डोंगरे के अनुसार, भारत में खाद्य प्रसंस्करण का स्तर एक दशक पहले लगभग 3-4 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 16-17 प्रतिशत तक पहुंच गया है। सरकार का लक्ष्य इसे 2030 या 2047 तक 25-30 प्रतिशत तक ले जाना है। उन्होंने कहा कि करीब 1.5 लाख करोड़ रुपये के पोस्ट-हार्वेस्ट नुकसान को बेहतर भंडारण और प्रसंस्करण के माध्यम से आर्थिक मूल्य में बदला जा सकता है। कार्यक्रम के आयोजक व कोइलनमेस्से प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक मिलिंद दीक्षित ने कहा कि उत्तर भारत खाद्य एवं पेय उद्योग के लिए विकास का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है। मजबूत कृषि आधार और विविध प्रसंस्करण क्षमताओं के कारण यह क्षेत्र घरेलू के साथ-साथ वैश्विक बाजारों के लिए भी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा, “वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का जैविक निर्यात 665.97 मिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। दिल्ली में आयोजित यह पहल मुंबई में होने वाले मुख्य संस्करण से पहले स्थानीय उद्यमों को वैश्विक बाजारों, अत्याधुनिक तकनीकों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारों से जोड़ने की दिशा में एक अहम रणनीतिक कदम है।”
भारत में बढ़ रहा अंतरराष्ट्रीय खाद्य उत्पादों का बाजार
फोरम ऑफ इंडियन फूड इंपोर्टर्स के संस्थापक एवं निदेशक अमित लोहानी ने कहा कि भारतीय उपभोक्ताओं की पसंद में तेजी से बदलाव हो रहा है और अंतरराष्ट्रीय खाद्य उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा, “हमारे करीब 30 प्रतिशत सदस्य अब संयुक्त उद्यमों के माध्यम से भारत में ही इतालवी पास्ता, फ्रेंच बटर और बेल्जियन बिस्कुट जैसे उत्पादों का निर्माण और निर्यात कर रहे हैं।”
लोहानी ने कहा कि ब्राजीलियाई कॉफी और इक्वाडोरियन क्विनोआ जैसे उत्पाद भी भारतीय उपभोक्ताओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हुए हैं। उनके मुताबिक, यह बढ़ती मांग भारत में 100 से 500 मिलियन डॉलर तक के वैश्विक निवेश को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
उन्होंने आगामी भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (EU FTA) से आयात शुल्क में संभावित रियायतों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ‘अनुगा इंडिया’ जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच वैश्विक निर्यातकों और भारतीय आयातकों के बीच व्यापारिक तालमेल को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
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